Rajasthan Election 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों से चल रहीं हैं. मुख्य मुकाबला दो प्रमुख पार्टियों के बीच यानी सत्तारूढ़ कांग्रेस और प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा के बीच है. राजस्थान में विधानसभा का चुनाव 2023 के अंत तक होने की संभावना है. राज्य की सत्ता फिलहाल तो कांग्रेस के हाथ में है, जो उसे बरकरार रखने की पूरी कोशिश कर रहीं है. जबकि BJP कांग्रेस को कांटे की टक्कर देने और सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है. ECI ने अब तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है. मगर राज्य के राजनीतिक माहौल की सरगर्मियां हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जा रही हैं.
- आम आदमी पार्टी भी राज्य में चुनाव लड़ सकती है.
- कर्नाटक चुनाव में जीत के फॉर्मूले के आधार पर कांग्रेस इस रेगिस्तानी राज्य में एक बार फिर सत्ता में बने रहने की रणनीति तैयार कर रही है.
- अभी राज्य में चुनाव की तारीखों का एलान नहीं हुआ है
- मगर पार्टियां पूरी तरह चुनावी मूड में आ चुकी हैं.
- इसी बीच एक सर्वे सामने आया हैं जिसमे कई बड़े खुलासे हुए हैं.
किसके सिर सजेगा जीत का सेहरा?: Rajasthan Election 2023
- हाल ही में हुए एक ओपिनियन पोल में इसका जवाब BJP को खुश करने वाला रहा है.
- इस बार राजस्थान में इस पोल के हिसाब से बीजेपी की जीत का अनुमान जाहिर किया गया है.
- सर्वे के मुताबिक बीजेपी को 109 से 119 सीटें मिल सकती हैं।
- वहीं Congress के खाते में 78 से 88 सीटें और अन्य को 1 से 5 सीटें जाने का अनुमान लगाया गया है।
- अगर यहीं हुआ तो राजस्थान में हर बार सरकार बदलने का रिकॉर्ड जारी रहेगा.
- राज्य में अभी अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार है.
सीएम के तौर पर लोगों की पहली पसंद कौन है?
- इसके जवाब बड़े दिलचस्ब आये हैं.
- ओपिनियन पोल में 35 फीसदी लोगों ने अशोक गहलोत को सीएम के तौर पर अपनी पहली पसंद बताया है.
- जबकि 25 फीसदी लोगों की पहली पसंद वसुंधरा राजे हैं.
- सचिन पायलट 19 फीसदी लोगों के समर्थन के साथ तीसरे नंबर पर हैं.
- बीजेपी के नेता गजेंद्र सिंह शेखावत 9 फीसदी समर्थन के साथ चौथे नंबर पर हैं.
- और राज्यवर्धन सिंह राठौड़ 5 फीसदी समर्थन के साथ पांचवें नंबर पर हैं.
बता दें कि राजस्थान की राजनीति में 1998 के बाद से सत्ता बारी-बारी से कांग्रेस और भाजपा के पास जाती रही है.
राज्य की जनता एक बार कांग्रेस तो अगली बार बीजेपी को सत्ता सौंपती रही है.
राज्य के अधिकांश मतदाता हर बार किसी एक पार्टी के साथ ही बने रहने में यकीन नहीं करते.
कोई भी पार्टी जातियों या समुदायों का ऐसा गठजोड़ नहीं बना पाई है, जो लगातार हर चुनाव में उसके साथ बना रहे और चुनावों पर अपना दबदबा कायम रख पाए.